30% तक डिस्काउंट पर खरीद सकते हैं नीलामी वाली प्रॉपर्टी, समझें तरीका

राज खोसला
प्रॉपर्टी मार्केट में लंबे समय से सुस्ती का आलम है। ऐसे में रियल एस्टेट डिवेलपर 5 से 10 प्रतिशत तक डिस्काउंट देकर लोगों को लुभा रहे हैं। हालांकि अगर आप कुछ रिसर्च और भागदौड़ करें तो आप इससे ज्यादा डिस्काउंट पा सकते हैं। बैंक लोन बकाया रहने पर जिन प्रॉपर्टी को जब्त कर लेते हैं, उन्हें आमतौर पर बाजार भाव से 20-30 प्रतिशत कम दाम पर नीलामी के जरिए बेचा जाता है।

बैंक ऑक्शन के जरिए हालांकि डील हासिल करना कुछ टेढ़ा मामला है। सिक्योरिटाइजेशन ऐंड रिकंस्ट्रक्शन ऑफ फाइनैंशल ऐसेट्स ऐंड एन्फोर्समेंट ऑफ सिक्यॉरिटीज इंटरेस्ट ऐक्ट 2002 के अनुसार, बैंकों को अपने नुकसान की भरपाई के लिए ‘रीपजेस्ड या स्ट्रेस्ड’ प्रॉपर्टी की नीलामी का अधिकार होता है। बॉरोअर जब पेमेंट कई बार मिस कर देता है तो बैंक उससे जुड़ी प्रॉपर्टी को जब्त कर लेते हैं।

हालांकि ऐसी डील आसान नहीं होती। बैंक ऑक्शन में प्रॉपर्टी पहली बार मकान खरीदने जा रहे लोगों के लिए मुश्किल मामला हो सकता है। ऐसे बायर प्राय: तमाम नियमों और प्रक्रियाओं से वाकिफ नहीं होते हैं। इन नीलामियों में लोगों की भागीदारी भी प्राय: काफी ज्यादा होती है। काफी निवेशक और खरीदार ऐसी सार्वजनिक नीलामी का इंतजार करते हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं कि बिडिंग प्रोसेस को किस तरह आसानी से पूरा किया जा सकता है और किस तरह आपकी जेब में इतनी रकम बच सकती है, जिससे आप प्रॉपर्टी का रेनोवेशन करा सकें।

हर तरह की लागत पर ध्यान दें
नीलामी में आने वाले अधिकतर प्रॉपर्टी के साथ कानूनी पचड़े जुड़े होते हैं। हो सकता है कि प्रॉपर्टी टैक्स या यूटिलिटी बिल या दूसरी कोई देय रकम बकाया हो। नीलामी के बाद बायर को ऐसा बकाया चुकाना होता है। लिहाजा बोली लगाते समय ऐसी लागत को भी ध्यान में रखें। इसका ध्यान नहीं रखेंगे तो असल लागत आपके अनुमान से कहीं ज्यादा हो सकती है।

प्रॉपर्टी का मूल्यांकन कराएं
यह पता लगाना संभव नहीं है कि नीलामी में अंतिम बोली कितने की होगी, लेकिन आप प्रॉपर्टी की मार्केट वैल्यू का अनुमान नीलामी से पहले लगा सकते हैं। नीलामी करने वाला बैंक एक बेस वैल्यू तय करता है। इसमें गाइडेंस वैल्यू (सरकारी नियमों के अनुसार), डीम्ड मार्केट वैल्यू और प्रॉपर्टी पर देनदारियों को ध्यान में रखते हुए बेस वैल्यू तय करता है।

आपको किसी प्रफेशनल प्रॉपर्टी इवैल्यूएटर से प्रॉपर्टी का मूल्यांकन कराना चाहिए। अप्रेजर जितनी वैल्यू बताए, उससे 10 प्रतिशत ज्यादा रकम की बोली उचित कही जा सकती है।

पैसे का इंतजाम पहले से कर लें
नीलामी शुरू होने से पहले आपको बैंक के पास अर्नेस्ट मनी जमा करनी होगी। यह प्रॉपर्टी की रिजर्व प्राइस के 10 प्रतिशत के बराबर होती है। आपकी बिड अगर सफल न हो तो यह रकम आपको लौटा दी जाएगी। हालांकि बोली लगाते समय आपको नीलामी वाले दिन ही बिड अमाउंट का 25 प्रतिशत देना होगा। आपकी बोली अगर सफल रही तो करीब 15 दिनों में आपको बोली की पूरी रकम बैंक को देनी होगी। अगर आप डेडलाइन के भीतर पेमेंट नहीं कर पाए तो डिपॉजिट अमाउंट लौटाया नहीं जाएगा।

लोन के लिए बैंक से लें मंजूरी
इस खरीदारी के लिए अगर आप लोन ले रहे हों तो बैंक से इसकी मंजूरी ले लें। डिस्ट्रेस्ड रेजिडेंशल प्रॉपर्टी की खरीद के लिए लोन दरअसल होम लोन ही होता है। ऐसा लोन आपको मिलेगा या नहीं, यह आपकी क्रेडिट हिस्ट्री और रीपेमेंट की क्षमता पर निर्भर करता है। बैंक इस शर्त पर लोन मंजूर करेगा कि असल में लोन दिए जाने से पहले आप प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन चार्जेज, स्टांप ड्यूटी और दूसरी लीगल कॉस्ट खुद उठाएंगे और प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के वैलिड डॉक्युमेंट बैंक के पास जमा करेंगे।

राह मुश्किल पर बचत का मौका
डिस्ट्रेस्ड प्रॉपर्टी की खरीदारी को कभी भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। बोली लगाने से पहले रिसर्च करें और नीलामी के नियमों का अध्ययन करें। यथासंभव प्रॉपर्टी के बारे में पूरी जानकारी हासिल करें। अगर आप इस मुश्किल राह पर चलने को तैयार हों तो आपको अच्छा फायदा भी होगा। आप एक करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी पर 20-30 लाख रुपये तक बचा सकते हैं।

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